Wednesday, November 30, 2016

राजगीर महोत्सव की सुरमई शाम | Kalpana Patowary





राजगीर महोत्सव की सुरमई शाम लोगों के लिए यादगार बन गया। मंच पर हिन्दी, भोजपुरी गानों की प्रस्तुति हुई। गायिका कल्पना ने अपनी गायिकी का रंग जमा दिया। आते ही छा गई कल्पना...

  • असम की कल्पना मंच पर आई और आते ही लोगों के दिलों दिमाग पर छा गई। कहा कि असम की कल्पना भोजपुरी कल्पना बन गई है।

  • इस मंच पर आने में हमें इतना समय क्यों लगा, पता नहीं। उन्होंने गणेश वंदना वक्रतुंड महाकाय सूर्य कोटि संप्रभा से शुरुआत की।

  • इसके बाद भगवान शिव को समर्पित जेकर नाथ भोले नाथ वो अनाथ कैसे होई, भोला चाह लिये दिन तो रात कैसे होई गाकर लोगों को झूमा दिया।

  • कार्यक्रम में विदेशी पर्यटक भी आए। मलेशिया के पर्यटकों को कल्पना ने भोजपुरी भाषा को अंग्रेजी में समझाया और कहा कि ये गाना आपके लिए गा रहूं हूं।

- उन्होंने मां शीतला माता पर आधारित मै मोरी झूलेला हो झुलवा गाया और इन्हें इसका अर्थ समझाया कि गांव में चिकेन पौक्स से प्रभावित लोग मां शीतला मंदिर जाकर पूजा-अर्चना करते हैं।





नोटबंदी और शराबबंदी को सराहा

  • कल्पना ही नहीं विदेशी पर्यटकों ने भी नोटबंदी और शराबबंदी को सराहा। कल्पना ने कहा इन दोनों को सपोर्ट की जरूरत है।

  • शराब ने सभी को बर्बाद किया है। मलेशिया से आयी पर्यटकों ने कहा कि नोटबंदी से सब परेशान दिखे, फिर भी पीएम मोदी की सराहना कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सही में यह बहुत बड़ा कदम है।

  • भिखारी ठाकुर की विश्व प्रसिद्ध लोक नाट्य रचना बेटीबेचवा ने लोगों को भावुक कर दिया। कल्पना ने इसके माध्यम से एक बूढ़े मां-बाप की बेबसी को दर्शाया कि कैसे एक बूढ़ा बाप अपनी जवान बेटी को बेच देता है।

  • उन्होंने इस नाटक में गीत रुपया गिनाई लेहला, पगहा धराई देला भी गाया और कहा कि कठोर ह्रदय का व्यक्ति भी इसे सुन कर द्रवित हो जाता है।

  • कल्पना ने कैसे बनी कैसे बनी फुलौड़ी बिना चटनी कैसे बनी, हाथ में मेंहदी मांग सिंदुरवा बरबादी कजरवा हो गैला, झर झर लोरवा मोर बहेरा हो बाप जी, जैसे गाने गाकर राजगीर की सर्द रात को रंगीन कर दिया।


- असमिया ड्रेस में भोजपुरी गाने दो राज्यों के सांस्कृतिक पहचान से एक साथ परिचय करा रहे थे।

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